पिछले कुछ दशकों से कीवी फल ने विश्वभर में अपनी लोकप्रियता बढ़ाई है। इसी कड़ी में अब भारत के किसानों ने भी इसकी खेती को लेकर रुचि दिखाई है। वैसे आपको बता दें कि कीवी की खेती के लिए उत्तराखंड का वातावरण काफी अनुकूल है। कीवी स्वादिष्ट व पौष्टिकता से भरपूर फल है। इसमें विटामिन बी, फास्फोरस, पौटिशयम व कैल्सियम तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। कहा जाता है कि यह फल डेंगू बुखार में बहुत फायदेमंद है।
जलवायु
कीवी भी नाशपत्ती की भांति ही एक पर्णपाती पौधा है। इसमें अप्रैल में फूल आते हैं। इसके पौधों के लिए मध्यवर्ती क्षेत्रों में समुद्र तल से 600 से 1500 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्र अनुकूल होते हैं। लेकिन इसमें पाले का प्रकोप प्रतिकूल होता है, इसलिए इसकी बागवानी ऐसे क्षेत्रों में नहीं की जा सकती है। इसलिए गर्मियों में जहां 35 डिग्री से कम तापमान रहता हो और तेज हवाएं चलती हो, ऐसे क्षेत्र कीवी के लिए उपयुक्त हैं।
मिट्टी
कीवी की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त है। लेकिन पौध रोपण से पहले मिट्टी का परीक्षण अवश्य करा लेना चाहिए। साथ ही ध्यान रखें कि इसमें जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था हो। वैसे कीवी फल पौधों के लिए 6.5 पी.एच. के आस पास की भूमि उपयुक्त रहती है। जो न तो अम्लीय है और न क्षारीय। इसलिए ऐसी मिट्टी का चयन कर पौधरोपण करें।
पौध रोपण व सिंचाई
कीवी का पौधरोपण व सिंचाई के लिए खास ध्यान रखना पड़ता है। बाग में 3 मीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 6 मीटर जरूरी है। कीवी के पौधे कि मादा पौधों की एक निश्चित संख्या के बीच में परागण हेतु एक नर पौधा भी लगा हो इसके लिए नर तथा मादा का अनुपात 1:6, 1:8 या 1:9 रखना चाहिए। पौधों को भरे हुए गड्ढों के मध्य में लगायें तथा उनके बाद तुरंत सिंचाई कर दें। मई-जून और सितम्बर-अक्टूबर में सिंचाई का पूरा प्रबन्ध आवशयक है। इस समय सिंचाई में अनियमित वृद्वि तथा उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डालते है।
खाद
कीवी का सही उत्पादन तभी संभव होगा, जब इसमें पौधों की वृद्धि के समय उर्वरकों का सही प्रयोग किया जाए। इसलिए निर्देशों के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए।
किस्में
कीवी की दो किस्में प्रमुख है- नर और मादा। इसके प्रवर्धन के लिए बीजू पौधे को प्रयोग में लाया जाता है।
काट-छांट
कीवी की पौधों की लताओं को ऊंचाई देने आधार देना आवश्यक है। इसका खास ध्यान रखें।
तोड़ाई
कीवी पौधों की औसत उपज का आंकलन करें इसके एक पौधों से  50-100 किग्रा फल पाए जाते हैं। इसकी तोड़ाई के लिए अक्टूबर-नवम्बर का महीना उपयुक्त है।
लंबे समय तक रखा जा सकता है
बताया जाता है कि कीवी के पौधों को शीतगृहों में महीनेभर से ज्यादा आसानी से भंडारण किया जा सकता है। इसलिए इसके पौधों को दूर भेजने में कोई दिक्कत नहीं होती है। इसलिए इसे बाजार में लंबे समय तक बेचकर लाभ कमाया जा सकता है।